Happy New Year to all…

Today is December thirty-first,

A day to remember the past,

Not to outburst, but to thank the past.

Not to haste, but to learn from the past.

Here comes another year,

A year to fulfill few more dreams

A year to make few more resolution

A year to accomplish those wishes

A year to act upon those resolutions.

A year to paint one more canvas

A year to build new future…

Let’s celebrate the ending

Welcome the beginning.

Let’s welcome 2021,

With the hope to remain healthy and wise…

Happy New Year to all…

Finally she sketched someone with a cat…

Enough was the word,

She spoke in her mind.

Tired working throughout the day

The worked extended everyday

Thought to give up someday

May be today was the day…

Could see her ideas getting crunched

Could see her thoughts being dumped

Not by anyone but by her work

No one to blame.

Her soul demanded peace

Something no one could cease…

Just got up at mid-night

Got hold of book to paint

Poured her frustration out

She sketched someone with a cat…

But result got her flabbergasted

Her creation is not yet vanished

Her strength is still instilled.

Just got herself relaxed and said,

“Don’t worry, things will fall in place when needed”

Finally she sketched someone with a cat…

Pic drawn: Prachi Acharya

आखिर उसका घर कब बनता है?

बचपन में माँ पापा के दिखाए नक़्शे पर चले

वह तो एकदम सही है,

आखिर बेटी किसे कहते है !!!

पर जब थोड़े बड़े हुए

तो थोड़ा सजना सवारना चाहा,

थोड़ा घूमना फिरना चाहा,

कुछ ख्वाइशें तो कुछ पाने की चाह;

सही है आखिर लड़की किसे कहते है!!!

पर माँ पापाने रोका …

शायद ज़माने के डर से

शायद वक्त के डर से

शायद लड़की की नज़ाकत के मद्देनज़र

सही है आखिर लड़की के माँ पापा है !!!

बस बेटी को बोल दिया…

ये सब अपने घर जाकर करना

साज श्रृंगार घूमना फिरना – सब अपने घर जाकर

तो फिर यह घर उसका क्या था ?

कुछ अरमान तो वही ख़तम हो गए…

अपना मायका उसका घर नहीं …

अपना घर माने उसका ससुराल …

समाज की यही तो रीत है….

अब शादी के बाद समज में आया

वहां पर तो सास-ससुर ही है सब कुछ

उनका कहा सराखों पर, अपना नहीं है सब कुछ

अब वही दूसरे माँ पापा, पति ही है अपना सब कुछ

अपनी मर्ज़ी तो कभी न बताई, पर न चला खुद का कुछ

अब यही तो खुद के माँ पापा ने सिखाया था

सही है आखिर बहु का धर्म है…

खुद के अरमान तो कही खो गए
लगा जैसे गायब से हो गए
कब कहाँ दिन चले गए

पता ही न लगा की कब बल पाक गए
खुद की आरज़ू का तो जैसे गाला ही घोंट दिया

पर एक सवाल आज भी उसके मन में कब से चूब रहा है…

जो अपना घर था क्या वो वाकेही में अपना था?

क्या यही समाज ही रीत है?

आखिर उसका घर कब बनता है?

यदि बनता है तो कब?

और यदि नहीं तो आखिर क्यों?

Pic Coutesy: depositphotos

Standing still, it spoke a lot to her…

I may look dry today,

But, will fill up during rains.

Be it storm, snow or sunny,

Have not succumb with nature

Have learnt the art to survive,

Have spread my roots

Managed to strengthen my foot.

Above and beneath the surface,

With no emotion to anticipate.

Yet shine, smile and stand still,

Give food, shelter selflessly.

Why can’t you humans behave like me???

Stand like a pillar, come what may???

And give much selflessly.

बस आज… दादा-दादी की याद आ गयी….

गॉँव के घर का चौका

और चूले से निकलता धुआँ |

वही मिट्टी के बर्तन 

और आधी अधूरी कपची से बनी झौपड़ी |

रात की वह ठंडी हवा 

और आंगन में लगा लालटेन

बस आज…

दादा-दादी की याद आ गयी….

Pic Courtesy: indianartzone.com

बात एक लड़की की आज़ादी की थी…

आज फिर से एक नया मोड आया,

किसीने एक राह चुनने को बोल दिया |

लगा जैसे तक़दीर ने भी साथ छोड़ दिया,

शायद स्वपन में भी ऐसा सोचा न था |


बात सिर्फ किसी के लिए कुछ छोड़ ने की न थी ,

पर अपने आप से खुद के वजूद को मारने की थी |

बात एक लड़की की आज़ादी की थी …


आज तक रस्ते में कठिनाइ तो बहुत थी,

फिर भी आपके बगैर साथ चल रही थी

अब तो कठिनाइयों से भी दोस्ती हो गयी थी |

पर आज उसे समज यह नहीं आ रहा था

यह पति का अह्म था या फिर उनकी जलन,

क्या बीवी का आगे बढ़ना एक मसाला था,

या फिर बीवी की प्रसद्धि एक समस्या थी |

उसने तो आपको हर मोड़ में सहारा दिया ,

तो फिर

आपको या आपके घरवालों को क्या परेशानी थी ???

क्यों आप उसके साथ नहीं दे सकते

क्यों उसे मजबूर किया जा रहा था !!!

क्या उसका वहां होना एक प्रश्न था ,

या उसकी प्रतिष्ठा विवाद का विषय थी |

बात एक लड़की की आज़ादी की थी…


आज उसे समज यह नहीं आ रहा था

क्यों किसी के लिए खुद का वजूद छोड़ दे ,

क्या लड़की को ही सब रिश्ते संभालने होते है ,

क्या लड़कों को कोई बंधन नहीं होता ?

बात एक लड़की की आज़ादी की थी…

Pic Courtesy: Futurity.org

I am unique…

Unspoken frustrated flower whispers:

I am…

Not an odd one out, but bit unique.

Not eccentric, but resemble both parents’ genes.

Not irreplaceable, but bit different.

Not unrepeatable, but likes being bicoloured.

I Create my own indentity, yet bit sytlish.

I am unique…I am me…

I am…

Just an individual with distinctive thoughts.

Just single sole with quirky thoughts.

Don’t…

Judge me for my attitude,

Stare at me for my specialty,

Pluck me for my outlook.

I am unique…I am me…

I like…

To blossom when raining

To flaunt when lonely

To bounce when needed.

But rather,

Respect me for my eccentricity

Admire me for my rarity.

And so,

I am unique…I am me…

Father means the world to her…

He may not say but he loves you.

He may not show but is more than hundred schoolmaster,

He may not sing but is best story teller.

He may not have sufficient money to fulfill your dreams,

But will always try to make you smile.

He may be just an ordinary man,

But will always be your super hero, guide and friend,

Who will always be by your side when you fumble.

He may not say but he loves you.

He may not show but will cry within if you are hurt.

He may not express but is ever ready to support you.

He may not say but will always worship for your victory.

He may be just an ordinary man,

But will always be your playmate, adviser and mentor

Who will always be by your side when you are in awkward situation.

Whom you desire to be like when you grow up…

No wonder I call him “My Daddy Strongest…”

Happy Father’s Day to all the fathers here…

Image courtesy: Todayville.com

इंसानों में तुलना कैसे?

पूनम के बाद की आज सुबह देख
और
लोगों को एकदूसरे की तुलना करते देख
एक सवाल मन में जगा…

सूरज तो अपनी रोशनी से प्रजवल्लित हो गया है
पर क्या
चाँद को अपनी चाँदनी छिपाना गँवारा है ?

माना की
सूरज की चमक से सारा जग उठता है
पर
चाँद की चाँदनी से चैन की नींद सोता है…

माना की
सूरज को साक्षात् भगवान समज हररोज़ प्रातः में पूजा जाता है
पर
शरदपूर्णिमा, नवरात्री और दीपावली भी चांद की वजह से है…

माना की
सूरज के प्रकाश से आँखों में ताजगी आती है
पर
चाँद की सफेदी से आँखों को सुकून मिलता है…

माना की ग्रहण के समय
सूरज गोल्डन रिंग बनाकर छीप जाता है
पर
चाँद तो लाल बन कर भी निराला लगता है…

अब जब भगवान से मिले
चाँद और सूरज की तुलना नहीं हो सकती
तो फिर भला भगवान के बनाए
इंसानों में तुलना कैसे हो सकती है?

Pic courtesy: Dreamtime